Breaking News

RSS ने कहा: एक हजार वर्ष की पराधीनता काल में हमारी संस्कृति का क्षरण होता रहा


लखनऊ, 26 नवम्बर 2023 (आईपीएन)। एक हजार वर्ष की पराधीनता काल में हमारी संस्कृति का क्षरण होता रहा। संस्कार भी खोने लगे। ऐसे में राष्ट्र की अखण्डता के मूल को जीवित रखने की आवश्यकता पड़ने लगी। देश की आजादी के समय में अंग्रेजों ने देश की संस्कृति को जिस प्रकार से खण्डित करने का षड्यन्त्र रचा था, उसे निष्‍प्रयोज्‍य करने के लिये राष्ट्रधर्म पत्रिका की 76 वर्ष पूर्व शुरुआत की गयी थी। बीते 9 वर्षों से जब देश को एक नयी दिशा मिलने लगी है तो राज्यों में हो रहे विकास कार्यों और राष्ट्र में हो रहे समुचित विकास को जन-जन तक पहुँचाने के लिये राष्‍ट्रधर्म पत्रिका का ‘राष्‍ट्रोन्‍मुख विकास’ अंक का प्रकाशन किया गया है। ये विचार राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने राजधानी के गोमतीनगर स्‍थ‍ित सीएमएस सभागार में राष्ट्रधर्म पत्रिका के विशेषांक विमोचन समारोह में प्रकट किये।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि इस पत्रिका में योग्य और विद्वान लोगों के विचार प्रकाशित किये जाते रहे हैं। देश में पहले कई पत्रिकाओं का प्रकाशन किया जाता था जो अब दिखती नहीं हैं। ऐसे में पाठकों को वैचारिक सामग्री देने का दायित्व यह राष्ट्रधर्म पत्रिका उठा रही है। उन्होंने कहा कि इस पत्रिका के प्रकाशन में भी कई तरह की परेशानियां आयीं। आरम्भ के समय में ही गांधीजी की हत्या और उसके बाद आपातकाल में प्रकाशन करना काफी दुरूह था। इसके बाद भी प्रकाशन का कार्य कुशलता से किया गया। आज देश में जब पठनीयता की समस्या दिख रही है। लोगों की पढ़ने की प्रवृत्ति कम होती जा रही है, तब भी इस पत्रिका के माध्यम से विचारों का संयोजन लगातार किया जा रहा है। आवश्‍यकता है कि हर घर में हिंदी या स्थानीय भाषा के साहित्य का एक कोना होना चाहिये। ऐसा न होने पर पठनीयता की आदत खत्म होते ही देश की संस्कृति भी प्रभावित हो जायेगी।
उन्होंने हिन्दुत्व पर कहा कि हजार वर्षों की पराधीनता काल में देश की संस्कृति प्रभावित हुई। पहले इस्‍लाम ने और उसके बाद अंग्रेजों ने हमारे देश को आर्थ‍िक रूप से लूटने के साथ ही सांस्‍कृतिक रूप से विकृत करने का  प्रयास किया परन्तु हिन्दुओं ने अपनी जीवनीशक्‍ति से खुद को और देश की संस्‍कृति को बचाये रखा। ऐसे में राष्‍ट्रधर्म पत्रिका ने भी अपना विशेष योगदान दिया है। मुगल काल में तीर्थयात्राओं पर लगने वाले कर (टैक्‍स) के बारे बताते हुये डॉ कृष्णगोपाल ने कहा कि जजिया के साथ ही तीर्थयात्रा एवं गंगा स्नान के टैक्स का बोझ उठाने के बाद भी हिंदुओं ने न तो तीर्थाटन छोड़ा और न ही गंगा स्‍नान। एक समय में मधुसूदन सरस्वती जी ने आगरा जाकर मुगल बादशाह से अपील की कि वह तीर्थयात्रा पर लगने वाला कर हटा दें। ऐसे में दारा शिकोह और उनकी बहन ने इसका समर्थन किया। अन्त में तीर्थयात्रा पर लगने वाला कर हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि संस्कृति का संरक्षक हिंदू मुगलों द्वारा बार-बार मंदिरों को तोड़े जाने के बाद भी मन्दिर का पुनर्निर्माण करता रहा क्योंकि मुगल हम हिन्दुओं की मंदिर बनाने की भावना को तोड़ने में असफल रहा था। उन्होंने अंत में कहा कि इस पत्रिका के माध्‍यम से देश में ऐसे विचारों को ही जीवंत रखने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से क्षेत्र प्रचारक अनिल, प्रान्त प्रचारक कौशल, राज्यसभा सांसद अशोक बाजपेयी, क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख मिथलेश नारायण, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही, राष्ट्रधर्म के निदेशक हरजीवन लाल, सुनील शुक्ल, सहक्षेत्र सम्पर्क प्रमुख मनोज, सहक्षेत्र सेवा प्रमुख युद्धवीर, प्रान्त प्रचार प्रमुख अशोक दूबे, पूर्व विधायक सुरेश चन्द्र त्रिपाठी, प्रचारक रामजी भाई, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री घनश्याम शाही समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।

Related News

Leave a Comment

Previous Comments

Loading.....

No Previous Comments found.